Message From Headmaster

 

एक प्रधानाध्यापक होने के नाते बच्चों में ही अपना सबकुछ खोजने का प्रयास करता हूँ ।हम शिक्षक विद्यालय के बच्चों की उम्मीद है और हमें उस उम्मीद पर खरा उतरना हैं। बच्चों को समझने के लिए हमें निश्चित रूप से बच्चा बनकर उनके साथ तालमेल बैठना होगा तब जाकर हम उनकी स्थिति को समझ पाएंगे और उनके लिए कार्य कर पाएंगे।

जो बच्चे अपने शिक्षकों के साथ सकारात्मक संबंध विकसित करते हैं वह सीखने के बारे में अधिक उत्साहित होते हैं, स्कूल आने के बारे में अधिक सकारात्मक होते हैं, उनका आत्मविश्वास और सीखने की उपलब्धि अधिक होती है। जो बच्चे अपने साथियों में अधिक स्वीकृत एवं मित्रता अनुभव करते हैं वे स्कूल के बारे में सकारात्मक सोच रखते हैं और अधिक सीखते हैं। इसलिए बच्चों में किसी भी दक्षता को विकसित करने के लिए पहले बच्चों के साथ हमें अपना भावात्मक संबंध स्थापित करना होगा ताकि हम उनके अंतर्मन को समझ सके और उनके लिए कुछ बेहतर और नया कर सकें । मैं यह भी कहना चाहूंगा कि बच्चों को कभी भी अपनी मातृभाषा बोलने से ना रोका जाए और उनके साथ यदि संभव हो तो उनकी मातृभाषा में ही उनसे बातचीत की जाए क्योंकि जितना अधिक बच्चे अपनी मातृभाषा में सीखते हैं उतना अधिक बच्चे और किसी और भाषा में नहीं सिख सकते हैं तथा बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को विकसित करने में भी मातृभाषा का प्रयोग एक बेहतर उपकरण के रूप में कार्य करेगा।


सिकेंद्र कुमार सुमन  (प्रधानाध्यापक )